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Modi's Mantra: India's Global Leap from Ancient Knowledge - Special Discussion on AI, KYC, and Kerala Kumbh - Viral Page (मोदी का मंत्र: प्राचीन ज्ञान से आधुनिक भारत की वैश्विक उड़ान - AI, KYC और केरल कुंभ पर विशेष चर्चा! - Viral Page)

"‘World amazed at how we preserve ancient knowledge’: Modi talks about AI Summit, KYC, Kerala Kumbh in Mann Ki Baat" – यह सिर्फ एक हेडलाइन नहीं, बल्कि भारत की बदलती वैश्विक पहचान का एक शक्तिशाली उद्घोष है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' के 108वें एपिसोड में इन महत्वपूर्ण विषयों पर प्रकाश डाला, जो एक ऐसे भारत की तस्वीर पेश करते हैं, जो अपनी जड़ों से जुड़ा रहकर भी भविष्य की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कैसे हमारा देश प्राचीन ज्ञान और आधुनिकता का अद्भुत संगम प्रस्तुत कर रहा है, जिससे पूरा विश्व चकित है।

इस एपिसोड में, पीएम मोदी ने मुख्य रूप से तीन अलग-अलग लेकिन परस्पर जुड़े हुए विषयों पर बात की: भारत में आयोजित 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) शिखर सम्मेलन', वित्तीय लेन-देन में महत्वपूर्ण 'नो योर कस्टमर (KYC)' प्रक्रिया और केरल की अनूठी परंपरा 'केरल कुंभ'। इन तीनों विषयों को एक साथ उठाकर, उन्होंने यह दर्शाया कि कैसे भारत अपनी सांस्कृतिक विरासत, नैतिक मूल्यों और पारंपरिक ज्ञान का उपयोग करके आज की जटिल वैश्विक चुनौतियों का समाधान प्रस्तुत कर रहा है।

प्राचीन ज्ञान और आधुनिक भारत की वैश्विक पहचान

प्रधानमंत्री का यह बयान कि "दुनिया चकित है कि हम प्राचीन ज्ञान को कैसे संरक्षित करते हैं," भारत की सभ्यतागत विरासत पर आधारित एक मजबूत आत्मविश्वास को दर्शाता है। यह सिर्फ अतीत की बात नहीं है, बल्कि यह वर्तमान में भारत की क्षमता और भविष्य के लिए उसकी दृष्टि का प्रतीक है। भारत ने हमेशा ज्ञान को संचित और प्रसारित करने पर जोर दिया है, चाहे वह योग और आयुर्वेद हो, या गणित और खगोल विज्ञान। आज, इसी प्राचीन ज्ञान को आधुनिक संदर्भों में लागू किया जा रहा है, जिससे भारत न केवल अपनी समस्याओं का समाधान कर रहा है, बल्कि विश्व के सामने एक नया मार्ग भी प्रस्तुत कर रहा है।

यह बयान इस बात पर भी जोर देता है कि भारत केवल पश्चिमी देशों की नकल करने वाला नहीं, बल्कि स्वयं एक विचारशील और नवोन्मेषी सभ्यता है। हमारी संस्कृति, हमारे ग्रंथ और हमारे रीति-रिवाज हमें केवल जीवन जीने का तरीका नहीं सिखाते, बल्कि हमें समस्याओं को नैतिक और मानवीय दृष्टिकोण से देखने का भी नजरिया देते हैं। यह दृष्टिकोण आज की तकनीकी रूप से उन्नत, लेकिन नैतिक रूप से दिशाहीन दुनिया के लिए विशेष रूप से प्रासंगिक है।

A mosaic of ancient Indian scriptures and modern tech gadgets, symbolizing the blend of tradition and technology.

Photo by Rowan Heuvel on Unsplash

भारत की वैश्विक स्थिति: एक विश्व गुरु के रूप में

भारत अब सिर्फ एक विकासशील देश नहीं रहा, बल्कि एक ऐसा राष्ट्र बन गया है जो अपनी संस्कृति, अपनी आध्यात्मिकता और अपनी तकनीकी प्रगति से दुनिया को प्रेरित कर रहा है। चाहे वह योग दिवस के माध्यम से वैश्विक स्वास्थ्य क्रांति हो या G20 अध्यक्षता के दौरान 'वन अर्थ, वन फैमिली, वन फ्यूचर' का मंत्र हो, भारत अपने प्राचीन मूल्यों के साथ दुनिया का नेतृत्व कर रहा है। 'मन की बात' में इन विषयों पर चर्चा करना इस वैश्विक पहचान को और मजबूत करता है।

AI शिखर सम्मेलन: भविष्य का भारत, प्राचीन सिद्धांतों के साथ

हाल ही में नई दिल्ली में 'ग्लोबल पार्टनरशिप ऑन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (GPAI) शिखर सम्मेलन' का आयोजन भारत की बढ़ती तकनीकी शक्ति का एक प्रमाण था। पीएम मोदी ने इस पर चर्चा करते हुए कहा कि AI के क्षेत्र में भारत ने न केवल अपनी क्षमता बढ़ाई है, बल्कि इसे मानवीय मूल्यों और नैतिक सिद्धांतों से जोड़ने का भी प्रयास किया है।

क्या हुआ और क्यों ट्रेंडिंग है?

यह शिखर सम्मेलन भारत द्वारा आयोजित सबसे बड़े AI सम्मेलनों में से एक था, जिसमें दुनिया भर के नीति निर्माता, विशेषज्ञ, उद्योगपति और शिक्षाविद एक छत के नीचे आए। इसका उद्देश्य AI के जिम्मेदार और मानव-केंद्रित विकास पर चर्चा करना था। यह विषय इसलिए ट्रेंडिंग है क्योंकि AI आज दुनिया की सबसे परिवर्तनकारी तकनीकों में से एक है, और इसके नैतिक उपयोग को लेकर वैश्विक स्तर पर चिंताएं हैं। भारत ने इस मंच पर AI के लिए एक ऐसा रोडमैप पेश किया जो नवाचार को बढ़ावा देने के साथ-साथ समानता और सुरक्षा सुनिश्चित करे।

पृष्ठभूमि और प्रभाव

भारत ने पिछले कुछ वर्षों में डिजिटल इंडिया पहल के तहत AI को एक महत्वपूर्ण विकास इंजन के रूप में देखा है। भारत की रणनीति "AI फॉर ऑल" पर केंद्रित है, जिसका अर्थ है कि AI का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुँचे। पीएम मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि भारत का लक्ष्य ऐसा AI बनाना है जो समावेशी हो, जो सभी के लिए उपयोगी हो और जो किसी को पीछे न छोड़े। यह सीधे तौर पर भारतीय दर्शन 'वसुधैव कुटुम्बकम्' (पूरी दुनिया एक परिवार है) से जुड़ा है, जो तकनीकी प्रगति को मानवीय कल्याण के साथ जोड़ता है। इस शिखर सम्मेलन ने भारत को AI के वैश्विक शासन में एक महत्वपूर्ण आवाज के रूप में स्थापित किया है।

भारत की AI रणनीति: मानवता पहले

भारत ने AI के विकास में पारदर्शिता, जवाबदेही और डेटा गोपनीयता जैसे मुद्दों पर विशेष ध्यान दिया है। यह हमारी प्राचीन बुद्धिमत्ता का ही एक प्रतिबिंब है, जो हमेशा 'सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय' (सभी के कल्याण और खुशी के लिए) पर जोर देती रही है। इस दृष्टिकोण से, AI सिर्फ एक उपकरण नहीं, बल्कि मानव प्रगति का एक साधन बन जाता है, जिससे संभावित खतरों को कम किया जा सके और इसके सकारात्मक प्रभावों को अधिकतम किया जा सके।

KYC: वित्तीय सुरक्षा और डिजिटल क्रांति

पीएम मोदी ने 'मन की बात' में KYC (Know Your Customer) प्रक्रिया की महत्ता पर भी बात की, जो भारत की वित्तीय प्रणाली में क्रांति ला रही है।

क्या हुआ और क्यों ट्रेंडिंग है?

KYC एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें वित्तीय संस्थाएं अपने ग्राहकों की पहचान और पते का सत्यापन करती हैं। पीएम मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि कैसे यह प्रक्रिया वित्तीय धोखाधड़ी को रोकने और पारदर्शिता बढ़ाने में मदद करती है। यह विषय हमेशा ट्रेंडिंग रहता है क्योंकि यह सीधे तौर पर आम आदमी की वित्तीय सुरक्षा और देश की अर्थव्यवस्था की अखंडता से जुड़ा है। डिजिटल इंडिया के युग में, ऑनलाइन लेन-देन और सेवाओं के लिए KYC एक अनिवार्य हिस्सा बन गया है।

पृष्ठभूमि और प्रभाव

भारत में KYC की शुरुआत धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग को रोकने के लिए की गई थी, लेकिन 'आधार' और डिजिटल पहचान के आगमन के साथ, यह एक शक्तिशाली उपकरण बन गया है जो वित्तीय सेवाओं को दूरदराज के क्षेत्रों तक पहुंचाने में मदद करता है। जन धन खातों से लेकर डिजिटल भुगतान तक, KYC ने प्रक्रियाओं को सरल और सुरक्षित बनाया है। इसने बिचौलियों को खत्म कर दिया है और सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे लाभार्थियों तक पहुंचाने में मदद की है, जिससे भ्रष्टाचार कम हुआ है और दक्षता बढ़ी है।

A person using a digital payment app on a smartphone, with secure transaction icons floating around, illustrating KYC's role in digital finance.

Photo by Anantha Krishnan on Unsplash

KYC: भरोसे की बुनियाद

हालांकि KYC प्रक्रिया में शुरुआत में कुछ चुनौतियां थीं, जैसे कि दस्तावेजीकरण की आवश्यकताएं, लेकिन अब डिजिटल KYC के माध्यम से इसे बहुत आसान बना दिया गया है। यह आम लोगों को बैंक खाते खोलने, बीमा खरीदने और अन्य वित्तीय सेवाओं तक पहुँचने में मदद करता है, जो पहले उनके लिए मुश्किल था। इस तरह, KYC ने न केवल वित्तीय सुरक्षा प्रदान की है, बल्कि वित्तीय समावेशन को भी बढ़ावा दिया है, जिससे देश के आर्थिक विकास में सभी की भागीदारी सुनिश्चित हुई है। यह भारत की उस क्षमता को दर्शाता है जहां जटिल प्रक्रियाओं को तकनीक की मदद से सरल और सुलभ बनाया जा सकता है।

केरल कुंभ: संस्कृति का संगम और पर्यावरण संरक्षण

पीएम मोदी ने 'मन की बात' में केरल की एक अनूठी परंपरा, 'केरल कुंभ' का उल्लेख किया। यह दर्शाता है कि कैसे भारत अपनी स्थानीय और क्षेत्रीय परंपराओं को भी राष्ट्रीय मंच पर महत्व देता है, और उनमें निहित प्राचीन ज्ञान को उजागर करता है।

क्या हुआ और क्यों ट्रेंडिंग है?

केरल कुंभ, जिसका जिक्र पीएम ने किया, यह आमतौर पर सबरीमाला अयप्पा मंदिर से जुड़े मंडलम-मकरविलक्कू महोत्सव को संदर्भित करता है, जिसे केरल का एक तरह का वार्षिक तीर्थयात्रा कुंभ माना जा सकता है। यह त्योहार लाखों भक्तों को आकर्षित करता है और प्राचीन अनुष्ठानों, भक्ति और सख्त पर्यावरणीय संरक्षण प्रथाओं का एक अनूठा संगम है। यह इसलिए ट्रेंडिंग है क्योंकि यह भारत की विविधता, उसकी गहरी सांस्कृतिक जड़ों और पर्यावरण के प्रति सम्मान को प्रदर्शित करता है, जो हमारी प्राचीन जीवनशैली का अभिन्न अंग है।

पृष्ठभूमि और प्रभाव

भारत में 'कुंभ' शब्द का संबंध आमतौर पर गंगा के किनारे होने वाले विशाल आयोजनों से होता है, लेकिन पीएम मोदी ने 'केरल कुंभ' का जिक्र करके यह दर्शाया कि कैसे देश के हर कोने में ऐसी परंपराएं हैं जो हजारों वर्षों से चली आ रही हैं और जो न केवल आध्यात्मिक महत्व रखती हैं, बल्कि सामाजिक और पर्यावरणीय मूल्यों को भी बढ़ावा देती हैं। केरल कुंभ जैसे त्योहार हमें प्रकृति के साथ सद्भाव में रहना सिखाते हैं। ये परंपराएं हमें सिखाती हैं कि कैसे संसाधनों का सम्मान किया जाए और उन्हें अगली पीढ़ियों के लिए संरक्षित किया जाए।

A vibrant photo of a traditional Kerala temple festival, with devotees participating in rituals amidst lush green surroundings, showcasing cultural richness and connection to nature.

Photo by Gayatri Malhotra on Unsplash

प्राचीन ज्ञान और संरक्षण का संदेश

इन परंपराओं में निहित ज्ञान न केवल धार्मिक है, बल्कि इसमें जीवन जीने, पर्यावरण की रक्षा करने और समुदाय में सामंजस्य स्थापित करने के लिए गहरी समझ भी है। केरल कुंभ जैसे आयोजन स्थानीय संस्कृति और विरासत को जीवित रखते हैं, साथ ही आने वाली पीढ़ियों के लिए हमारी अनमोल परंपराओं को आगे बढ़ाते हैं। यह हमें याद दिलाता है कि हमारा प्राचीन ज्ञान सिर्फ किताबों में नहीं, बल्कि हमारी जीवनशैली और हमारे त्योहारों में भी गहराई से समाहित है।

भारत की वैश्विक पहचान: प्राचीन से आधुनिक तक

पीएम मोदी ने 'मन की बात' में इन तीनों विषयों – AI, KYC और केरल कुंभ – को एक साथ लाकर यह संदेश दिया कि भारत एक ऐसा देश है जो अपनी प्राचीन जड़ों को नहीं भूलता, बल्कि उन्हें आधुनिक दुनिया की चुनौतियों का सामना करने के लिए एक मजबूत आधार बनाता है। चाहे वह AI के क्षेत्र में नैतिक नेतृत्व की बात हो, वित्तीय प्रणाली में पारदर्शिता लाने की बात हो, या अपनी अनूठी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने की बात हो, भारत हर क्षेत्र में अपने सिद्धांतों और मूल्यों के साथ आगे बढ़ रहा है।

समग्र विकास की भारतीय गाथा

यह 'समग्र विकास' की भारतीय गाथा है, जहाँ तकनीकी प्रगति आध्यात्मिक विकास और सांस्कृतिक संरक्षण के साथ चलती है। भारत अब केवल एक विकासशील राष्ट्र नहीं, बल्कि एक वैश्विक नेता है जो दुनिया को एक नया मार्ग दिखा रहा है – एक ऐसा मार्ग जहाँ विज्ञान और आध्यात्मिकता, प्रौद्योगिकी और परंपरा एक साथ मिलकर मानवता के कल्याण के लिए काम करते हैं। यही कारण है कि दुनिया भारत के इस अनूठे मिश्रण से 'चकित' है और प्रेरणा ले रही है।

हमें गर्व है कि हमारा देश अपनी समृद्ध विरासत को संभालते हुए एक उज्ज्वल भविष्य की ओर अग्रसर है। यह सिर्फ एक बयान नहीं, बल्कि एक हकीकत है जो हर भारतीय को सशक्त करती है और दुनिया को एक बेहतर कल की उम्मीद देती है।

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स्रोत: Indian Express (मूल खबर लिंक - हमारा लेख पूरी तरह मूल विश्लेषण है, कोई कॉपीराइट उल्लंघन नहीं।)

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