सरकार ने अश्लील सामग्री स्ट्रीमिंग के लिए पाँच OTT प्लेटफॉर्म्स को ब्लॉक कर दिया है। यह कदम उन डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ लिया गया है जो कथित तौर पर भारतीय कानूनों और नैतिकता के मानदंडों का उल्लंघन करते हुए अश्लील और आपत्तिजनक सामग्री प्रसारित कर रहे थे। 'Viral Page' आपको इस पूरे मामले की गहन जानकारी दे रहा है।
क्या हुआ?
हाल ही में, भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने एक बड़ा और निर्णायक कदम उठाते हुए पाँच ओवर-द-टॉप (OTT) स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स और उनसे जुड़ी दस मोबाइल एप्लीकेशन्स को तत्काल प्रभाव से ब्लॉक कर दिया है। इसके साथ ही, इन प्लेटफॉर्म्स से जुड़े सोशल मीडिया अकाउंट्स को भी हटाने के निर्देश दिए गए हैं। मंत्रालय ने यह कार्रवाई उन रिपोर्ट्स और शिकायतों के आधार पर की है जिनमें इन प्लेटफॉर्म्स पर गंभीर रूप से अश्लील, भद्दा और कभी-कभी तो पॉर्नोग्राफिक कंटेंट स्ट्रीम करने की बात सामने आई थी।
यह कार्रवाई सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम, 2000 और सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 के प्रावधानों के तहत की गई है, जो सरकार को आपत्तिजनक या गैर-कानूनी सामग्री को ब्लॉक करने की शक्ति प्रदान करते हैं। इस आदेश के बाद, ये प्लेटफॉर्म अब भारत में एक्सेस नहीं किए जा सकते, जिससे इनके करोड़ों संभावित दर्शकों तक इनकी पहुँच रुक गई है।
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बैकग्राउंड: OTT नियमों का उदय
भारतीय मनोरंजन उद्योग में OTT प्लेटफॉर्म्स का आगमन क्रांति से कम नहीं था। इसने दर्शकों को अपनी पसंद का कंटेंट, कभी भी और कहीं भी देखने की आजादी दी। लेकिन इस आजादी के साथ ही कंटेंट पर नियंत्रण को लेकर चिंताएँ भी बढ़ने लगीं। शुरुआती दौर में, OTT प्लेटफॉर्म्स पर सेंसरशिप या विनियमन का कोई सीधा कानून नहीं था, जिससे कंटेंट क्रिएटर्स को प्रयोग करने की खुली छूट मिली।
OTT विनियमन की आवश्यकता
जैसे-जैसे इन प्लेटफॉर्म्स की लोकप्रियता बढ़ी, वैसे-वैसे कुछ प्लेटफॉर्म्स पर अश्लील, हिंसक और आपत्तिजनक सामग्री की शिकायतें भी बढ़ने लगीं। इन शिकायतों में विशेष रूप से बच्चों और युवाओं पर ऐसे कंटेंट के संभावित नकारात्मक प्रभाव को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की गई थी। समाज के विभिन्न वर्गों, राजनीतिक नेताओं और अभिभावकों की ओर से सरकार पर इन प्लेटफॉर्म्स को विनियमित करने का दबाव बढ़ा।
इसी के परिणामस्वरूप, फरवरी 2021 में, केंद्र सरकार ने 'सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021' अधिसूचित किए। इन नियमों का उद्देश्य डिजिटल मीडिया और OTT प्लेटफॉर्म्स को जवाबदेह बनाना था, जबकि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को भी बनाए रखना था। इन नियमों में शिकायत निवारण तंत्र, स्व-नियमन के लिए निकाय और सरकार द्वारा आपातकालीन शक्तियों का प्रावधान शामिल है ताकि आपत्तिजनक सामग्री को तेज़ी से हटाया जा सके। यह वर्तमान कार्रवाई इन्हीं नियमों के तहत की गई है, जो दर्शाता है कि सरकार इन नियमों को गंभीरता से लागू कर रही है।
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क्यों ट्रेंडिंग है यह खबर?
सरकार का यह फैसला कई कारणों से ट्रेंडिंग है और चर्चा का विषय बना हुआ है:
- अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बनाम सेंसरशिप: यह कार्रवाई एक बार फिर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सरकारी विनियमन के बीच की बहस को सामने ले आई है। कुछ लोग इसे आवश्यक कदम मानते हैं, तो कुछ इसे सेंसरशिप की ओर एक और कदम।
- बढ़ता OTT बाजार: भारत दुनिया के सबसे बड़े और सबसे तेज़ी से बढ़ते OTT बाजारों में से एक है। ऐसे में किसी भी प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध लगाना पूरे उद्योग को प्रभावित करता है और भविष्य की कंटेंट रणनीतियों को आकार दे सकता है।
- नैतिकता और भारतीय संस्कृति: भारतीय समाज में नैतिकता और सांस्कृतिक मूल्यों का अत्यधिक महत्व है। अश्लील सामग्री पर कार्रवाई को कई लोग इन मूल्यों की रक्षा के रूप में देखते हैं।
- बच्चों की सुरक्षा: अभिभावकों और बाल अधिकार कार्यकर्ताओं के लिए यह एक बड़ी चिंता का विषय रहा है कि बच्चे आसानी से अनुपयुक्त सामग्री तक पहुँच सकते हैं। यह प्रतिबंध बच्चों को ऐसी सामग्री से बचाने की दिशा में एक कदम के रूप में देखा जा रहा है।
- सरकार की दृढ़ता: यह दिखाता है कि सरकार केवल चेतावनी देने तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़े कदम उठाने से भी नहीं हिचकेगी।
प्रभाव: एक बहुआयामी विश्लेषण
इस प्रतिबंध का प्रभाव सिर्फ इन पाँच प्लेटफॉर्म्स तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह पूरे डिजिटल मनोरंजन इकोसिस्टम पर गहरा असर डालेगा:
तत्काल और लघुकालिक प्रभाव
- ब्लॉक हुए प्लेटफॉर्म्स पर: इन प्लेटफॉर्म्स के लिए अब भारत में संचालन असंभव हो जाएगा। उन्होंने जो निवेश किया होगा, वह व्यर्थ जाएगा। उनके दर्शक और सब्सक्राइबर रातोंरात अपनी पहुँच खो देंगे।
- उपयोगकर्ताओं पर: उन उपयोगकर्ताओं के लिए निराशा होगी जो इन प्लेटफॉर्म्स की सामग्री का उपभोग कर रहे थे। हालांकि, अधिकांश वैध दर्शक शायद ही इन विशिष्ट प्लेटफॉर्म्स पर हों, जो अक्सर अधिक मुख्यधारा के ओटीटी विकल्पों से अलग होते हैं।
OTT उद्योग पर दीर्घकालिक प्रभाव
- आत्म-नियमन में वृद्धि: अन्य OTT प्लेटफॉर्म्स अब अपने कंटेंट को लेकर और अधिक सतर्क हो सकते हैं। वे अपनी लाइब्रेरी की समीक्षा कर सकते हैं और यह सुनिश्चित करने के लिए सख्त आंतरिक दिशानिर्देश लागू कर सकते हैं कि वे भारतीय कानूनों और आचार संहिता का उल्लंघन न करें।
- कंटेंट क्रिएशन पर असर: कंटेंट क्रिएटर्स और प्रोड्यूसर्स पर भी इसका असर पड़ेगा। वे ऐसा कंटेंट बनाने से बच सकते हैं जिसे सरकार द्वारा "अश्लील" या "आपत्तिजनक" माना जा सकता है, जिससे रचनात्मक स्वतंत्रता पर थोड़ा अंकुश लग सकता है।
- निवेशकों की चिंता: OTT सेक्टर में निवेश करने वाले निवेशक अब नियामक जोखिमों को अधिक गंभीरता से आंक सकते हैं, जिससे कुछ समय के लिए नए निवेश में कमी आ सकती है।
सामाजिक और सांस्कृतिक प्रभाव
- सार्वजनिक नैतिकता का संरक्षण: जो लोग अश्लील सामग्री के प्रसार को समाज के लिए हानिकारक मानते हैं, वे इस कदम का स्वागत करेंगे। यह कदम सार्वजनिक नैतिकता और मूल्यों के संरक्षण के सरकार के संकल्प को दर्शाता है।
- डिजिटल साक्षरता और अभिभावकीय नियंत्रण की आवश्यकता: यह घटना एक बार फिर डिजिटल साक्षरता और बच्चों के लिए अभिभावकीय नियंत्रण के महत्व को उजागर करती है, ताकि वे हानिकारक सामग्री से सुरक्षित रह सकें।
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कुछ तथ्य
- मंत्रालय: सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार।
- कार्यवाही का आधार: सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम, 2000 और सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021। विशेष रूप से, नियमों का नियम 16, जो आपातकालीन शक्तियों से संबंधित है, का उपयोग ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई के लिए किया जाता है।
- लक्ष्य: 5 OTT प्लेटफॉर्म्स और 10 मोबाइल एप्लीकेशन्स। इन प्लेटफॉर्म्स के नाम अक्सर कम प्रसिद्ध होते हैं और ये मुख्यधारा के OTT प्लेयर्स से अलग होते हैं, जो अक्सर बहुत ही विशिष्ट और अक्सर आपत्तिजनक कंटेंट के लिए जाने जाते हैं।
- आरोप: अश्लील, भद्दा, अनुपयुक्त और कभी-कभी तो नग्नता या यौन कृत्यों को दर्शाने वाला कंटेंट, जो भारतीय दंड संहिता और अन्य कानूनों का उल्लंघन करता है।
- विशेषता: ये प्लेटफॉर्म अक्सर विज्ञापन-समर्थित या कम लागत वाले सब्सक्रिप्शन मॉडल पर चलते थे, जिससे वे व्यापक दर्शकों तक पहुँच पाते थे।
दोनों पक्ष: स्वतंत्रता बनाम विनियमन
सरकार के इस फैसले पर समाज में दो अलग-अलग दृष्टिकोण उभरकर सामने आए हैं:
सरकार और समर्थकों का तर्क
- नैतिकता का संरक्षण: सरकार का प्राथमिक तर्क यह है कि ऐसी अश्लील सामग्री भारतीय समाज के नैतिक ताने-बाने के खिलाफ है और इसे रोकना आवश्यक है।
- बच्चों की सुरक्षा: बच्चों और किशोरों को ऐसी सामग्री से बचाना सरकार की नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी है। डिजिटल स्पेस में वयस्कों के लिए सामग्री को नियंत्रित करना मुश्किल हो सकता है, लेकिन बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है।
- कानून का पालन: इन प्लेटफॉर्म्स ने स्पष्ट रूप से भारतीय कानूनों और डिजिटल मीडिया आचार संहिता नियमों का उल्लंघन किया है, जिसके लिए कार्रवाई आवश्यक थी।
- स्वस्थ डिजिटल वातावरण: एक स्वस्थ और सुरक्षित डिजिटल वातावरण सुनिश्चित करना, जहाँ उपयोगकर्ता बिना किसी डर के सामग्री का उपभोग कर सकें, महत्वपूर्ण है। अश्लील सामग्री का प्रसार इस वातावरण को दूषित करता है।
आलोचकों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के समर्थकों का तर्क
- सेंसरशिप का डर: आलोचकों को डर है कि यह कदम सेंसरशिप की ओर एक झुकाव है, जहाँ सरकार अपनी मनमर्जी से कंटेंट को नियंत्रित कर सकती है।
- परिभाषा की अस्पष्टता: "अश्लील" या "आपत्तिजनक" की परिभाषा व्यक्तिपरक हो सकती है और इसका दुरुपयोग हो सकता है, जिससे रचनात्मक स्वतंत्रता खतरे में पड़ सकती है।
- वयस्कों की पसंद का अधिकार: उनका मानना है कि वयस्कों को यह तय करने का अधिकार होना चाहिए कि वे क्या देखना चाहते हैं, बशर्ते वह कानूनी हो। इसके बजाय, आयु-आधारित प्रतिबंध या कंटेंट चेतावनियाँ अधिक उपयुक्त उपाय हो सकती हैं।
- सरकारी अति-पहुँच: कुछ लोग इसे सरकारी अति-पहुँच और डिजिटल स्पेस पर अधिक नियंत्रण स्थापित करने के प्रयास के रूप में देखते हैं, जो नवाचार और स्वतंत्र विचारों को बाधित कर सकता है।
- चिलिंग इफेक्ट: इस तरह की कार्रवाइयाँ अन्य कंटेंट क्रिएटर्स और प्लेटफॉर्म्स पर एक 'चिलिंग इफेक्ट' डाल सकती हैं, जिससे वे विवादास्पद या संवेदनशील विषयों पर काम करने से बच सकते हैं, भले ही वह कलात्मक रूप से वैध हो।
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यह घटना भारतीय डिजिटल मीडिया परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण मोड़ है। यह दर्शाता है कि सरकार अब केवल चेतावनी देने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ ठोस कार्रवाई करेगी। यह कदम OTT प्लेटफॉर्म्स को अपने कंटेंट की जिम्मेदारी लेने और भारतीय कानूनों का सम्मान करने के लिए एक कड़ा संदेश देता है। आने वाले समय में, यह देखना दिलचस्प होगा कि यह प्रतिबंध OTT उद्योग और कंटेंट क्रिएशन की दिशा को कैसे प्रभावित करता है।
आपको क्या लगता है? क्या सरकार का यह कदम सही है? नीचे कमेंट सेक्शन में अपनी राय ज़रूर दें। इस जानकारीपूर्ण पोस्ट को अपने दोस्तों और परिवार के साथ शेयर करें, और ऐसी ही ताज़ा और वायरल खबरों के लिए 'Viral Page' को फॉलो करना न भूलें!
स्रोत: Indian Express (मूल खबर लिंक - हमारा लेख पूरी तरह मूल विश्लेषण है, कोई कॉपीराइट उल्लंघन नहीं।)
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