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Billions in Unclaimed Money in LIC and EPFO: Centre Reveals Latest Figures! - Viral Page (LIC और EPFO में पड़ा है अरबों का लावारिस पैसा: केंद्र सरकार ने जारी किए ताज़ा आंकड़े! - Viral Page)

LIC और EPFO में कितना लावारिस पैसा पड़ा है? केंद्र ने जारी किए ताज़ा आंकड़े। यह सवाल हाल ही में पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया है, जब केंद्र सरकार ने संसद में इस संबंध में चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए। यह सिर्फ कोई सामान्य वित्तीय खबर नहीं, बल्कि लाखों-करोड़ों आम नागरिकों की मेहनत की कमाई से जुड़ा एक ऐसा रहस्य है, जो अब परत-दर-परत खुल रहा है। 'Viral Page' पर आज हम इसी ज्वलंत मुद्दे की तह तक जाएंगे, यह समझने की कोशिश करेंगे कि यह पैसा किसका है, क्यों फंसा हुआ है और इसे वापस कैसे पाया जा सकता है।

क्या हुआ और केंद्र सरकार ने क्या बताया?

हाल ही में संसद सत्र के दौरान, केंद्र सरकार ने भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) और कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) में पड़े लावारिस धन (Unclaimed Money) का विस्तृत ब्यौरा दिया। इन आंकड़ों ने देश के कोने-कोने में हलचल मचा दी है। आंकड़ों के अनुसार:

  • LIC के पास लावारिस धन: केंद्र सरकार ने बताया कि LIC के पास लगभग 21,500 करोड़ रुपये से अधिक की ऐसी राशि पड़ी है, जिस पर अभी तक किसी ने दावा नहीं किया है। यह वह पैसा है जो बीमा पॉलिसियों की परिपक्वता, मृत्यु दावों या अतिरिक्त प्रीमियम के रूप में जमा हुआ है, लेकिन पॉलिसीधारक या उनके नामांकित व्यक्तियों द्वारा इसे उठाया नहीं गया है।
  • EPFO के पास लावारिस धन: वहीं, EPFO के पास निष्क्रिय खातों में लगभग 49,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि पड़ी हुई है। यह पैसा कर्मचारियों के भविष्य निधि (PF) अंशदान, पेंशन फंड और कर्मचारी जमा लिंक्ड बीमा (EDLI) से संबंधित है, जिसे खाताधारकों या उनके वारिसों ने अब तक क्लेम नहीं किया है।

कुल मिलाकर, इन दो प्रमुख वित्तीय संस्थानों के पास लगभग 70,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि लावारिस पड़ी है। यह आंकड़ा इतना विशाल है कि यह किसी भी व्यक्ति को सोचने पर मजबूर कर सकता है कि यह पैसा आखिर किसका है और क्यों यह सिस्टम में फंसकर रह गया है। यह खुलासा वित्त मंत्रालय द्वारा किया गया, जिसने इन संस्थाओं को जनता के पैसे की सुरक्षा और उन्हें वापस दिलाने के लिए कड़े कदम उठाने का निर्देश दिया है।

क्या है यह लावारिस पैसा और क्यों जमा हो जाता है?

यह लावारिस पैसा वह धनराशि है जो बीमा पॉलिसियों या भविष्य निधि खातों में जमा होती है, लेकिन एक निश्चित अवधि तक उस पर कोई दावा नहीं किया जाता। इसके कई कारण हो सकते हैं, जिन्हें समझना बेहद ज़रूरी है:

बीमा पॉलिसियों का लावारिस पैसा (LIC)

LIC में जमा लावारिस धन मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में आता है: परिपक्वता राशि (Maturity Amount), मृत्यु दावा राशि (Death Claim Amount) और प्रीमियम वापसी (Premium Refund)। इसके जमा होने के पीछे कई प्रमुख कारण हैं:

  • नामांकन की कमी या गलत जानकारी: कई पॉलिसीधारक अपनी पॉलिसी में नामांकित व्यक्ति का नाम दर्ज नहीं कराते या गलत जानकारी भर देते हैं। पॉलिसीधारक की मृत्यु के बाद, वारिसों को दावे की प्रक्रिया में भारी कठिनाई होती है।
  • पता बदलना और सूचित न करना: पॉलिसीधारक अक्सर अपना पता बदल लेते हैं, लेकिन LIC को इसकी सूचना देना भूल जाते हैं। ऐसे में महत्वपूर्ण पत्राचार उन तक नहीं पहुंच पाता।
  • दस्तावेजों का गुम होना: पॉलिसी बॉन्ड या अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज खो जाने पर भी लोग दावा करने से कतराते हैं, क्योंकि उन्हें प्रक्रिया जटिल लगती है।
  • जागरूकता की कमी: कई लोगों को यह जानकारी ही नहीं होती कि उन्हें अपनी पॉलिसी से पैसे निकालने या किसी दावे के लिए आवेदन करने का अधिकार है।
  • छोटी राशि समझना: कई बार, छोटी राशि होने के कारण लोग इसे लेने की जहमत नहीं उठाते, जिससे यह भी लावारिस धन में जुड़ जाती है।

एक पुरानी, धूल भरी बीमा पॉलिसी की किताब और कुछ दस्तावेज़ एक लकड़ी की मेज पर बिखरे पड़े हैं, जो वर्षों से लावारिस पड़े धन का प्रतीक हैं।

Photo by Rahul Mishra on Unsplash

कर्मचारी भविष्य निधि का लावारिस पैसा (EPFO)

EPFO में लावारिस धन मुख्य रूप से उन निष्क्रिय खातों से आता है जिन पर लंबे समय तक कोई लेनदेन नहीं होता। इसके भी कई कारण हैं:

  • नौकरी बदलने पर PF ट्रांसफर न करना: यह सबसे आम कारणों में से एक है। कर्मचारी एक कंपनी से दूसरी कंपनी में जाते समय अपने पुराने PF खाते की राशि नए खाते में ट्रांसफर नहीं करवाते, जिससे पुराना खाता निष्क्रिय हो जाता है।
  • सदस्य की मृत्यु पर परिवार को जानकारी न होना: कई मामलों में, कर्मचारी की मृत्यु के बाद उनके परिवार को PF खाते या उससे जुड़ी EDLI स्कीम के बारे में जानकारी नहीं होती, जिससे दावे नहीं किए जाते।
  • KYC अपडेट न होना: आधार, पैन या बैंक खाते जैसी जानकारी अपडेट न होने के कारण भी निकासी में दिक्कत आती है और खाते निष्क्रिय पड़े रहते हैं।
  • छोटी राशि और अनदेखी: LIC की तरह ही, PF खाते में छोटी राशि होने पर लोग इसे निकालने में दिलचस्पी नहीं दिखाते।
  • पेंशन खाते की जानकारी का अभाव: कई सेवानिवृत्त कर्मचारियों को अपनी पेंशन के बारे में पूरी जानकारी नहीं होती, या वे इसे निकालने की प्रक्रिया से अनजान रहते हैं।

यह पैसा केवल सरकार या इन संस्थानों का नहीं है; यह आम जनता का है जो उन्होंने अपने और अपने परिवार के भविष्य के लिए बचाया था।

क्यों बन गई यह खबर वायरल और ट्रेंडिंग?

केंद्र सरकार के इस खुलासे के बाद, यह खबर सोशल मीडिया से लेकर हर घर तक पहुंच गई है। इसके वायरल होने और ट्रेंड करने के कई कारण हैं:

  • आंकड़ों का विशाल होना: 70,000 करोड़ रुपये का आंकड़ा अपने आप में चौंकाने वाला है। इतनी बड़ी राशि का लावारिस पड़ा होना हर किसी को अपनी ओर खींच रहा है।
  • सीधा प्रभाव: यह पैसा सीधे आम नागरिक की बचत और भविष्य से जुड़ा है। हर कोई सोच रहा है, "क्या कहीं मेरा या मेरे किसी परिचित का पैसा भी तो फंसा नहीं है?"
  • पारदर्शिता की मांग: इस खुलासे ने सरकार और वित्तीय संस्थानों से अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग को बढ़ावा दिया है। लोग जानना चाहते हैं कि इस समस्या से निपटने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
  • जागरूकता में वृद्धि: इस खबर के वायरल होने से कई लोग अपने पुराने खातों और पॉलिसियों की जांच करने लगे हैं, जिससे जागरूकता बढ़ी है।
  • सोशल मीडिया पर चर्चा: लोग अपने अनुभव साझा कर रहे हैं, सवाल पूछ रहे हैं और समाधान खोजने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे यह विषय लगातार चर्चा में बना हुआ है।

विभिन्न आयु वर्ग के लोग अपने स्मार्टफोन और लैपटॉप पर चिंतित भाव से कुछ खोज रहे हैं, जो केंद्र सरकार के खुलासे के बाद आम जनता की बेचैनी और जागरूकता को दर्शाता है।

Photo by Krishna Yadav on Unsplash

जनता और सरकार: दोनों पक्षों की बात

इस मुद्दे पर आम जनता और सरकार/संस्थानों, दोनों के अपने-अपने दृष्टिकोण और चुनौतियां हैं:

आम नागरिक की चिंताएं:

  • जटिल प्रक्रिया: पैसा वापस पाने की प्रक्रिया अक्सर जटिल और कागजी कार्रवाई से भरी होती है, जिससे कई लोग दावा करने से पीछे हट जाते हैं।
  • दस्तावेजों की कमी: पुराने दस्तावेज खो जाना या उपलब्ध न होना एक बड़ी बाधा है।
  • जागरूकता का अभाव: अभी भी लाखों लोग हैं जिन्हें अपने अधिकारों और दावा प्रक्रिया के बारे में पूरी जानकारी नहीं है।
  • धोखाधड़ी का डर: ऑनलाइन या ऑफलाइन माध्यमों से जानकारी इकट्ठा करते समय धोखाधड़ी का डर भी बना रहता है।

सरकार और संस्थानों के प्रयास:

सरकार और LIC/EPFO जैसी संस्थाएं इस समस्या से निपटने के लिए कई कदम उठा रही हैं:

  • जागरूकता अभियान: समय-समय पर जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं ताकि लोग अपने लावारिस धन का दावा कर सकें।
  • ऑनलाइन पोर्टल: LIC की वेबसाइट पर 'Unclaimed Amounts' सेक्शन और EPFO का UAN पोर्टल/ई-पासबुक सेवा ग्राहकों को अपने पैसे की स्थिति जानने में मदद करती है।
  • KYC और नामांकन को अनिवार्य करना: अब खातों को सक्रिय रखने और दावा प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए KYC और नामांकन को अनिवार्य किया जा रहा है।
  • वरिष्ठ नागरिक कल्याण कोष (SCWF): LIC में 10 साल से अधिक समय तक लावारिस पड़ी राशि को वरिष्ठ नागरिक कल्याण कोष (Senior Citizens' Welfare Fund) में स्थानांतरित कर दिया जाता है, हालांकि इसका दावा अभी भी किया जा सकता है।
  • निष्क्रिय खातों का प्रबंधन: EPFO निष्क्रिय खातों को सक्रिय करने और दावा प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है।

अपना पैसा कैसे पाएं वापस? स्टेप-बाय-स्टेप गाइड

अगर आपको लगता है कि आपका या आपके किसी परिचित का पैसा LIC या EPFO में फंसा हो सकता है, तो घबराएं नहीं! इसे वापस पाने की प्रक्रिया उतनी मुश्किल नहीं है जितनी दिखती है।

LIC के लिए:

  1. ऑनलाइन जांच करें:
    • LIC की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं।
    • 'Unclaimed Amounts' या 'Unclaimed Policy Dues' सेक्शन खोजें। यह अक्सर वेबसाइट के फुटर (सबसे नीचे) या 'ऑनलाइन सेवाएं' (Online Services) अनुभाग में मिलता है।
    • यहां आपको अपना पॉलिसी नंबर, पॉलिसीधारक का नाम, जन्म तिथि और पैन नंबर (यदि आवश्यक हो) दर्ज करने का विकल्प मिलेगा।
    • जानकारी दर्ज करने के बाद, सिस्टम आपको बताएगा कि उस पॉलिसी नंबर या नाम से कोई लावारिस राशि है या नहीं।
  2. दावा प्रस्तुत करें:
    • यदि आपको लावारिस राशि मिलती है, तो निकटतम LIC शाखा से संपर्क करें।
    • आपको कुछ दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे, जिनमें शामिल हैं: मूल पॉलिसी बॉन्ड, पहचान प्रमाण (आधार/पैन), पता प्रमाण, बैंक खाते का विवरण (पासबुक या चेक), और यदि मृत्यु दावा है तो मृत्यु प्रमाण पत्र।
    • LIC अधिकारी आपको दावा फॉर्म भरने और आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने में मदद करेंगे।

EPFO के लिए:

  1. UAN पोर्टल का उपयोग करें:
    • यदि आपके पास यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) है, तो EPFO के सदस्य पोर्टल पर लॉगिन करें।
    • यहां आप 'ई-पासबुक' सेक्शन में जाकर अपने सभी PF खातों का बैलेंस और स्टेटस देख सकते हैं।
    • अगर कोई पुराना PF खाता निष्क्रिय है, तो आप उसे मौजूदा खाते में ट्रांसफर करने या सीधे निकालने का विकल्प चुन सकते हैं।
  2. 'Know Your PF Balance' सेवा:
    • आप EPFO की वेबसाइट पर बिना लॉगिन किए भी 'Know Your PF Balance' सेवा का उपयोग कर सकते हैं। इसके लिए आपको अपना राज्य, PF कार्यालय और PF नंबर (Establishment Code, Extension और Account Number) दर्ज करना होगा।
    • आप एक मिस्ड कॉल (011-22901406 पर) या SMS (EPFOHO UAN ENG लिखकर 7738299899 पर भेजकर) भी अपने PF बैलेंस की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
  3. दावा प्रस्तुत करें:
    • यदि आपको निष्क्रिय खाता या लावारिस राशि मिलती है, तो KYC (आधार, पैन, बैंक खाता) को अपने UAN से लिंक करना सुनिश्चित करें।
    • ऑनलाइन निकासी के लिए, आप UAN पोर्टल पर 'ऑनलाइन सेवा' (Online Services) अनुभाग में 'क्लेम (फॉर्म-31, 19, 10C)' (Claim (Form-31, 19, 10C)) विकल्प का उपयोग कर सकते हैं।
    • मृत्यु दावों के लिए, नामांकित व्यक्ति या कानूनी वारिस को फॉर्म 20 (PF निकासी), फॉर्म 10D (पेंशन) और फॉर्म 5IF (EDLI) भरकर EPFO कार्यालय में जमा करना होगा।

आगे क्या? चुनौतियां और समाधान

यह स्पष्ट है कि सरकार और वित्तीय संस्थानों को इस समस्या से निपटने के लिए और भी बहुत कुछ करने की आवश्यकता है। कुछ प्रमुख चुनौतियां और उनके संभावित समाधान इस प्रकार हैं:

  • जागरूकता का प्रसार: दूरदराज के क्षेत्रों और कम पढ़े-लिखे लोगों तक जानकारी पहुंचाने के लिए व्यापक अभियान, स्थानीय भाषाओं में जानकारी और आसान प्रक्रियाएं ज़रूरी हैं।
  • डिजिटल डिवाइड को कम करना: ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट पहुंच और डिजिटल साक्षरता बढ़ाना ताकि लोग ऑनलाइन सेवाओं का लाभ उठा सकें।
  • प्रक्रिया का सरलीकरण: दावा प्रक्रिया को और अधिक उपयोगकर्ता-अनुकूल और कम कागजी कार्रवाई वाला बनाना। सिंगल विंडो सिस्टम या सेंट्रलाइज्ड पोर्टल की दिशा में काम करना।
  • नामांकन को अनिवार्य और आसान बनाना: हर वित्तीय उत्पाद में नामांकन को अनिवार्य बनाना और इसकी प्रक्रिया को बहुत सरल बनाना।
  • प्रो-एक्टिव दृष्टिकोण: वित्तीय संस्थानों को केवल दावा आने का इंतजार करने के बजाय, खुद सक्रिय रूप से लावारिस धन के हकदारों का पता लगाने की कोशिश करनी चाहिए।

केंद्र सरकार का यह खुलासा एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसने देश के करोड़ों लोगों का ध्यान इस गंभीर मुद्दे की ओर खींचा है। अब यह हम पर निर्भर करता है कि हम अपनी और अपने प्रियजनों की वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जागरूक रहें और सही कदम उठाएं।

यह जानकारी आपके दोस्तों और परिवार के साथ शेयर करें, शायद यह उनके किसी काम आ जाए। आपको क्या लगता है, इस समस्या का सबसे अच्छा समाधान क्या है? नीचे कमेंट्स में हमें बताएं। ऐसी और भी महत्वपूर्ण और वायरल खबरों के लिए 'Viral Page' को फॉलो करना न भूलें!

स्रोत: Indian Express (मूल खबर लिंक - हमारा लेख पूरी तरह मूल विश्लेषण है, कोई कॉपीराइट उल्लंघन नहीं।)

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